Thursday, July 2, 2026

INTERNATIONAL PLASTIC BAG FREE DAY- 03 JULY 2026

 

Plastic bags, often used once and discarded, contribute to soil, water, and ocean pollution. Millions of marine animals die annually due to plastic ingestion, and microplastics enter the human food chain. International Plastic Bag Free Day 2026 serves as a reminder that small changes, like switching to cloth or jute bags, can make a significant environmental impact.

International Plastic Bag Free Day 2026 Theme

The 2026 theme emphasizes “Breaking Free from Single-Use Plastics: Towards a Sustainable Future”, urging citizens to adopt reusable bags and make conscious choices in daily life. Schools and organizations create International Plastic Bag Free Day posters, drawings, and campaigns to spread awareness and educate communities about the harms of plastic.


International Plastic Bag Free Day 2026 is more than a symbolic day—it is a global call to action for reducing single-use plastics and adopting sustainable practices. From individual steps like using reusable bags to community-driven initiatives like clean-ups and awareness campaigns, everyone can contribute to a healthier planet.



Sunday, June 28, 2026

शब्दों से राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले 'साहित्य सम्राट': बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जयंती विशेष


दिनांक: 27 जून, 2026

आज भारतीय राष्ट्रवाद के अग्रदूत और अद्वितीय उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 188वीं जयंती है।

जब भी हम अपनी मातृभूमि के सम्मान में सिर झुकाते हैं, तो हमारे होंठों पर एक धुन और कुछ शब्द अपने आप तैरने लगते हैं — "वंदे मातरम, सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्..."। इस कालजयी गीत को रचकर पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाले महापुरुष और कोई नहीं, बल्कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ही थे। 

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय: जीवन के कुछ पन्ने

बंकिम चंद्र जी का जन्म 27 जून, 1838 को बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कंठालपाड़ा गाँव में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुई।

आपको यह जानकर गर्व होगा कि वे और उनके मित्र जदुनाथ बोस, कलकत्ता विश्वविद्यालय से कला स्नातक (BA) की डिग्री प्राप्त करने वाले पहले दो भारतीय थे। इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और ब्रिटिश सरकार के अधीन डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त हुए। सरकारी सेवा की व्यस्तताओं और अंग्रेजों के कड़े नियमों के बीच रहते हुए भी, उन्होंने अपने भीतर के लेखक और देशभक्त को कभी मरने नहीं दिया।

'साहित्य सम्राट' का युगांतरकारी योगदान

बंकिम चंद्र जी को बंगाली और भारतीय साहित्य का 'साहित्य सम्राट' कहा जाता है। उन्होंने ऐसे समय में लिखना शुरू किया जब भारतीय समाज आधुनिकता और अपनी जड़ों के बीच राह तलाश रहा था। उन्होंने गद्य (Prose) को एक नई दिशा दी।

आइए नज़र डालते 

हैं उनकी कुछ ऐसी रचनाओं पर जिन्होंने इतिहास बदल दिया:

  1. आनंदमठ (1882): यह केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का घोषणापत्र था। 1770 के दशक के संन्यासी विद्रोह पर आधारित इस उपन्यास ने भारतीयों में सोए हुए स्वाभिमान को जगाया। इसी उपन्यास का हिस्सा है हमारा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम'

  2. दुर्गेशनंदिनी (1865): यह उनका पहला बंगाली उपन्यास था, जिसने रातों-रात उन्हें एक महान लेखक के रूप में स्थापित कर दिया। इसकी शैली ने बंगाली गद्य का स्वरूप हमेशा के लिए बदल दिया।

  3. कपालकुंडला और देवी चौधुरानी: इन उपन्यासों में बंकिम चंद्र जी ने मजबूत महिला पात्रों को समाज के सामने रखा, जो उस दौर के हिसाब से बेहद क्रांतिकारी कदम था।

  4. 'वंगदर्शन' पत्रिका (1872): उन्होंने इस साहित्यिक पत्रिका का संपादन शुरू किया, जिसने बंगाल के बौद्धिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण (Renaissance) में रीढ़ की हड्डी का काम किया। रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान लेखक भी इस पत्रिका को पढ़कर बड़े हुए थे।                                                                              बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उपन्यास 'आनंदमठ' और उसमें शामिल 'वंदे मातरम' गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों के लिए सबसे बड़ी ऊर्जा का स्रोत बन गया था। इस गीत को गाने पर ब्रिटिश सरकार ने रोक तक लगा दी थी!

एक छात्र और पाठक के रूप में, बंकिम चंद्र जी का जीवन हमें सिखाता है कि "लेखनी में तलवार से भी अधिक ताकत होती है।" उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी की व्यस्तताओं के बीच भी समय निकालकर ऐसा साहित्य रचा जिसने एक पूरे देश को जगा दिया।

एक विद्यार्थी के रूप में, बंकिम चंद्र जी का जीवन हमें कई महत्वपूर्ण बातें सिखाता है:

  • समय का प्रबंधन (Time Management): वे एक उच्च सरकारी पद पर थे, जिस पर काम का भारी दबाव रहता था। इसके बावजूद उन्होंने रात के सन्नाटे में जागकर कालजयी उपन्यासों की रचना की। अगर हमारे पास दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो पढ़ाई के साथ-साथ हम अपनी हॉबी और रचनात्मकता के लिए समय निकाल सकते हैं।

  • कलम की ताकत (Power of Pen): उन्होंने साबित किया कि बदलाव लाने के लिए हमेशा हथियारों की जरूरत नहीं होती। सही विचार और प्रभावशाली शब्द एक पूरे देश की सोच को बदल सकते हैं।

  • अपनी संस्कृति पर गर्व: अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने और ब्रिटिश सरकार की नौकरी करने के बाद भी, बंकिम बाबू अपनी भाषा, संस्कृति और मिट्टी से जुड़े रहे।


Monday, June 22, 2026

केन्द्रीय विद्यालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल गौचर की प्रातःकालीन सभा में गूंजा संविधान का गौरव: छात्रों को मिली मूल प्रति की झलक, पुस्तकालय में होगी प्रदर्शित- 22/06/2026 (मंगलवार)

 


  केन्द्रीय विद्यालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल गौचर की प्रातःकालीन सभा में दिनांक 22/06/2026 (मंगलवार) को भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गयी भारतीय संविधान की मूल प्रति की प्रिंट कॉपी को सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को दिखाया गया | इस अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक श्री राज कुमार यादव (पी.जी.टी.अर्थशास्त्र) ने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान की मूल प्रति के इतिहास, इसके महत्व और इसकी अनूठी विशेषताओं से विस्तार से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि हमारा संविधान देश की आत्मा है और इसके आदर्शों को समझना हर नागरिक का कर्तव्य है।

इस गौरवपूर्ण क्षण को आगे बढ़ाते हुए, विद्यालय के माननीय प्राचार्य श्री संदीप त्यागी  जी ने संविधान की इस विशेष प्रिंट कॉपी को आधिकारिक रूप से विद्यालय की पुस्तकालय अध्यक्ष श्रीमती पूजा शर्मा को सौंप दिया। इस अवसर पर प्राचार्य श्री संदीप त्यागी जी ने कहा, "यह प्रति हमारे विद्यालय की एक अमूल्य धरोहर होगी। इस प्रति को सुरक्षित रूप से प्रदर्शित करने के लिए पुस्तकालय में एक विशेष 'संविधान कोना' (Constitution Corner) तैयार किया जा रहा है। ताकि हर छात्र इसे करीब से देख सके, इसके पन्नों को पलट सके और हमारे संविधान निर्माताओं के विज़न को महसूस कर सके। 


संविधान की इस खूबसूरत प्रति को देखने के लिए छात्रों में भारी उत्साह देखा गया।



Saturday, June 20, 2026

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस -2026 - (21 June 2026 ( Sunday)


केंद्रीय विद्यालय गोचर में प्रातःकालीन योगशाला

वार्षिक आयोजन से लेकर रोजमर्रा की सेहत तक

2015 में अपने पहले आयोजन के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक वार्षिक कार्यक्रम से विकसित होकर विश्व के सबसे बड़े सहभागी स्वास्थ्य आंदोलनों में से एक बन गया है। यह योग के साझा अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लाखों लोगों को एक साथ लाता है। 2026 का संस्करण, जिसका विषय 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है , राष्ट्रव्यापी भागीदारी , नवीन पहलों और वर्ष भर के जुड़ाव के माध्यम से इस यात्रा को आगे बढ़ाता है, साथ ही निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सक्रिय जीवन शैली को बढ़ावा देता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: इस वर्ष क्या हो रहा है?

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण 21 जून 2026 को मनाया जा रहा है , जिसका मुख्य राष्ट्रीय आयोजन कोलकाता में हो रहा है । इस वर्ष का विषय 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है , जो जीवन भर स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली पर बढ़ते वैश्विक जोर को दर्शाता है। जैसे-जैसे जनसंख्या वृद्ध हो रही है और गैर-संक्रामक रोग तथा जीवनशैली से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं, जोर केवल जीवन के वर्षों को बढ़ाने से हटकर स्वास्थ्य अवधि, जीवन की गुणवत्ता और समग्र कल्याण को बढ़ाने पर केंद्रित हो रहा है।

योग के माध्यम से स्वस्थ वृद्धावस्था की नींव का निर्माण

स्वस्थ वृद्धावस्था को अब जीवन भर कार्यात्मक क्षमता, गतिशीलता, संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी बनाए रखने की क्षमता के रूप में समझा जा रहा है। इसी संदर्भ में, योग एक बहुआयामी अभ्यास प्रदान करता है जो शारीरिक गतिविधि, श्वास नियमन और ध्यान को जोड़ता है। ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे अभ्यास मुद्रा और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, साथ ही लंबे समय तक बैठने के प्रभावों को भी कम करते हैं। भुजंगासन और मकरासन रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और विश्राम में सहायक होते हैं; वहीं अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे श्वास अभ्यास श्वास जागरूकता और मानसिक शांति को बढ़ावा देते हैं। ध्यान एकाग्रता और भावनात्मक कल्याण को और भी बेहतर बनाता है। इस प्रकार, ये सभी एक साथ स्वस्थ वृद्धावस्था के कई निर्धारकों का समर्थन करते हैं।

केंद्रीय विद्यालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल गोचर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की झलकियां












Thursday, April 30, 2026

बुद्ध पूर्णिमा -01/05/2026 (विशेष पठन)

 

 आज एक बहुत ही विशेष दिन है—बुद्ध पूर्णिमा। यह दिन शांति, दया और प्रेम का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

उनके जीवन की एक छोटी और प्यारी कहानी 

कौन थे महात्मा बुद्ध?

बहुत समय पहले, हिमालय की गोद में स्थित कपिलवस्तु नाम के एक राज्य में एक राजकुमार का जन्म हुआ। उनका नाम था सिद्धार्थ। राजकुमार सिद्धार्थ का मन महल की सुख-सुविधाओं में नहीं लगता था। वे हमेशा सोचते थे कि दुनिया में दुख क्यों है और हम सबको खुश कैसे रख सकते हैं?

दयालु सिद्धार्थ और हंस की कहानी

एक बार सिद्धार्थ अपने बगीचे में टहल रहे थे, तभी एक घायल हंस उनके पैरों के पास आकर गिरा। उसे किसी शिकारी ने तीर मारा था। सिद्धार्थ ने बड़े प्यार से हंस का तीर निकाला और उसके घाव धोए। तभी उनका चचेरा भाई देवदत्त वहां आया और बोला, "यह हंस मेरा है, मैंने इसे मारा है!"

सिद्धार्थ ने शांति से जवाब दिया, "मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।" अंत में हंस सिद्धार्थ को ही मिला क्योंकि उन्होंने उसकी जान बचाई थी।

ज्ञान की प्राप्ति

बड़े होकर सिद्धार्थ ने सत्य की खोज के लिए अपना राजपाठ छोड़ दिया। कई सालों की तपस्या के बाद, एक वैशाख पूर्णिमा की रात को उन्हें एक पीपल के पेड़ के नीचे 'ज्ञान' प्राप्त हुआ। तब से उन्हें 'बुद्ध' कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है—"जिसे सब पता हो" या "जागृत व्यक्ति"।

बुद्ध की 3 खास बातें (जो हम सीख सकते हैं):

अहिंसा: किसी भी जीव को चोट न पहुँचाना, चाहे वह छोटा सा कीड़ा ही क्यों न हो।

सच्चाई: हमेशा सच बोलना और नेक रास्ते पर चलना।

करुणा (Kindness): दूसरों की मदद करना और सबके प्रति मन में प्यार रखना।

आज के दिन हम क्या करते हैं?

लोग सफेद कपड़े पहनते हैं जो शांति का प्रतीक हैं।

बौद्ध मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं और फूलों से सजावट की जाती है।



महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं विद्यार्थियों के लिए न केवल महान विचार हैं, बल्कि ये एक सफल और संतुलित जीवन जीने का "टाइम मैनेजमेंट टूल" भी हैं।

यहाँ बुद्ध की कुछ प्रमुख शिक्षाएं दी गई हैं, जो एक विद्यार्थी के जीवन को बदल सकती हैं:

🌟 विद्यार्थियों के लिए बुद्ध के अनमोल विचार

1. वर्तमान में जीना (Focus on Today)

"अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।"

सीख: अक्सर छात्र पुरानी गलतियों या आने वाली परीक्षाओं के डर में खोए रहते हैं। बुद्ध सिखाते हैं कि अगर आप आज के पाठ (Lesson) पर ध्यान देंगे, तो भविष्य अपने आप सुधर जाएगा।

2. अनुशासन और अभ्यास (Discipline)

"एक घड़ा बूंद-बूंद करके भरता है।"

सीख: सफलता रातों-रात नहीं मिलती। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ना और अभ्यास करना आपको एक दिन टॉपर या एक्सपर्ट बना सकता है।

3. क्रोध और वाणी पर नियंत्रण

"क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है; इसमें जलते आप खुद ही हैं।"

सीख: स्कूल या दोस्तों के बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है। बुद्ध कहते हैं कि गुस्सा सिर्फ आपका नुकसान करता है, इसलिए हमेशा शांत रहकर अपनी ऊर्जा पढ़ाई में लगायें।

4. स्वयं पर विश्वास (Self-Belief)

"अपना दीपक स्वयं बनें (अप्प दीपो भव)।"

सीख: दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी मेहनत और बुद्धि पर भरोसा करें। अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढने की कोशिश करना ही आपको आत्मनिर्भर बनाता है।

5. बुरी संगति से बचना

"एक दुष्ट मित्र से जंगली जानवर की तुलना में अधिक डरना चाहिए; क्योंकि जानवर आपके शरीर को घायल कर सकता है, लेकिन एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को भ्रष्ट कर सकता है।"

सीख: विद्यार्थी जीवन में सही दोस्तों का चुनाव बहुत जरूरी है। जो आपको लक्ष्य से भटकाएं, उनसे दूर रहना ही बुद्धिमानी है।

 विद्यार्थी इसे कैसे अपनाएं?

सत्य बोलें: झूठ बोलने से मन में डर पैदा होता है, जिससे एकाग्रता (Concentration) कम होती है।

परोपकार: अपने सहपाठियों (Classmates) की पढ़ाई में मदद करें। ज्ञान बांटने से बढ़ता है।

ध्यान (Meditation): रोज कम से कम 10 मिनट शांत बैठकर सांसों पर ध्यान दें। इससे याददाश्त और फोकस बढ़ता है।

सादगी: सादा जीवन और उच्च विचार रखें। फिजूल की चीजों के पीछे भागने से समय बर्बाद होता है।

महात्मा बुद्ध के अनुसार, "मस्तिष्क ही सब कुछ है; आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं।" इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचें और अपनी मेहनत पर भरोसा रखें।

Thursday, April 23, 2026

विश्व किताब व कॉपीराइट दिवस/ World Book And Copyright Day -23 April 2026

 


विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस 2026 (World Book and Copyright Day) 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। यूनेस्को (UNESCO) द्वारा घोषित यह दिन पठन-पाठन, प्रकाशन और कॉपीराइट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य किताबों और लेखकों के महत्व को मान्यता देना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है। 

2026 में विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के प्रमुख पहलू:

तिथि: 23 अप्रैल 2026। 

उद्देश्य: पुस्तकों, प्रकाशन, और कॉपीराइट (बौद्धिक संपदा) के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना। 

महत्व: यह दिन लेखकों और साहित्य को सम्मानित करता है और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करता है। 

इतिहास: यह तिथि शेक्सपियर, मिगेल डे सर्वेंट्स और इंका गार्किलासो डी ला वेगा जैसे महान लेखकों की पुण्यतिथि से प्रेरित है, जो विश्व साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। 

आयोजन: दुनिया भर में, विशेषकर स्कूल, पुस्तकालय और प्रकाशक इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं। 

आप इस दिन को कैसे मना सकते हैं:

अपनी पसंदीदा किताब को दोबारा पढ़ें।

किसी पुस्तक मेले या पुस्तकालय में जाएँ।

बच्चों को किताबें उपहार में दें और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। 

यह दिन हमें याद दिलाता है कि किताबें ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत हैं और हमारी संस्कृति को संरक्षित करती हैं।

Sunday, April 19, 2026

WORLD HERITAGE DAY/विश्व विरासत दिवस - 18 APRIL 2026

 विश्व विरासत दिवस हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।

विश्व धरोहर दिवस का इतिहास

विश्व विरासत दिवस की शुरुआत 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) द्वारा की गई थी। बाद में 1983 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे आधिकारिक मान्यता दी, जिसके बाद यह दिन वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा।

विरासत दिवस का महत्व

यह दिन हमें हमारी सांस्कृतिक पहचान और इतिहास को बचाने का संदेश देता है। पुरानी इमारतें, स्मारक और प्राकृतिक स्थल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को हमारे अतीत से जोड़ते हैं।

विश्व विरासत दिवस की थीम?

हर साल विश्व विरासत दिवस एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। 2026 की थीम है, संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया। (Emergency Response for Living Heritage in the Context of Conflicts and Disasters)

LIST OF WORLD HERITAGE SITES IN INDIA/भारत की विश्व विरासत स्थलों की सूची

Cultural 36
Natural 7
Mixed 1


















INTERNATIONAL PLASTIC BAG FREE DAY- 03 JULY 2026

  Plastic bags, often used once and discarded, contribute to soil, water, and ocean pollution. Millions of marine animals die annually due t...