संविधान की इस खूबसूरत प्रति को देखने के लिए छात्रों में भारी उत्साह देखा गया।
वार्षिक आयोजन से लेकर रोजमर्रा की सेहत तक
2015 में अपने पहले आयोजन के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक वार्षिक कार्यक्रम से विकसित होकर विश्व के सबसे बड़े सहभागी स्वास्थ्य आंदोलनों में से एक बन गया है। यह योग के साझा अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लाखों लोगों को एक साथ लाता है। 2026 का संस्करण, जिसका विषय 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है , राष्ट्रव्यापी भागीदारी , नवीन पहलों और वर्ष भर के जुड़ाव के माध्यम से इस यात्रा को आगे बढ़ाता है, साथ ही निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सक्रिय जीवन शैली को बढ़ावा देता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: इस वर्ष क्या हो रहा है?
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण 21 जून 2026 को मनाया जा रहा है , जिसका मुख्य राष्ट्रीय आयोजन कोलकाता में हो रहा है । इस वर्ष का विषय 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है , जो जीवन भर स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली पर बढ़ते वैश्विक जोर को दर्शाता है। जैसे-जैसे जनसंख्या वृद्ध हो रही है और गैर-संक्रामक रोग तथा जीवनशैली से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं, जोर केवल जीवन के वर्षों को बढ़ाने से हटकर स्वास्थ्य अवधि, जीवन की गुणवत्ता और समग्र कल्याण को बढ़ाने पर केंद्रित हो रहा है।
योग के माध्यम से स्वस्थ वृद्धावस्था की नींव का निर्माण
स्वस्थ वृद्धावस्था को अब जीवन भर कार्यात्मक क्षमता, गतिशीलता, संज्ञानात्मक स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी बनाए रखने की क्षमता के रूप में समझा जा रहा है। इसी संदर्भ में, योग एक बहुआयामी अभ्यास प्रदान करता है जो शारीरिक गतिविधि, श्वास नियमन और ध्यान को जोड़ता है। ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे अभ्यास मुद्रा और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, साथ ही लंबे समय तक बैठने के प्रभावों को भी कम करते हैं। भुजंगासन और मकरासन रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और विश्राम में सहायक होते हैं; वहीं अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे श्वास अभ्यास श्वास जागरूकता और मानसिक शांति को बढ़ावा देते हैं। ध्यान एकाग्रता और भावनात्मक कल्याण को और भी बेहतर बनाता है। इस प्रकार, ये सभी एक साथ स्वस्थ वृद्धावस्था के कई निर्धारकों का समर्थन करते हैं।
केंद्रीय विद्यालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल गोचर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की झलकियां
आज एक बहुत ही विशेष दिन है—बुद्ध पूर्णिमा। यह दिन शांति, दया और प्रेम का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
उनके जीवन की एक छोटी और प्यारी कहानी
कौन थे महात्मा बुद्ध?
बहुत समय पहले, हिमालय की गोद में स्थित कपिलवस्तु नाम के एक राज्य में एक राजकुमार का जन्म हुआ। उनका नाम था सिद्धार्थ। राजकुमार सिद्धार्थ का मन महल की सुख-सुविधाओं में नहीं लगता था। वे हमेशा सोचते थे कि दुनिया में दुख क्यों है और हम सबको खुश कैसे रख सकते हैं?
दयालु सिद्धार्थ और हंस की कहानी
एक बार सिद्धार्थ अपने बगीचे में टहल रहे थे, तभी एक घायल हंस उनके पैरों के पास आकर गिरा। उसे किसी शिकारी ने तीर मारा था। सिद्धार्थ ने बड़े प्यार से हंस का तीर निकाला और उसके घाव धोए। तभी उनका चचेरा भाई देवदत्त वहां आया और बोला, "यह हंस मेरा है, मैंने इसे मारा है!"
सिद्धार्थ ने शांति से जवाब दिया, "मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।" अंत में हंस सिद्धार्थ को ही मिला क्योंकि उन्होंने उसकी जान बचाई थी।
ज्ञान की प्राप्ति
बड़े होकर सिद्धार्थ ने सत्य की खोज के लिए अपना राजपाठ छोड़ दिया। कई सालों की तपस्या के बाद, एक वैशाख पूर्णिमा की रात को उन्हें एक पीपल के पेड़ के नीचे 'ज्ञान' प्राप्त हुआ। तब से उन्हें 'बुद्ध' कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है—"जिसे सब पता हो" या "जागृत व्यक्ति"।
✨ बुद्ध की 3 खास बातें (जो हम सीख सकते हैं):
अहिंसा: किसी भी जीव को चोट न पहुँचाना, चाहे वह छोटा सा कीड़ा ही क्यों न हो।
सच्चाई: हमेशा सच बोलना और नेक रास्ते पर चलना।
करुणा (Kindness): दूसरों की मदद करना और सबके प्रति मन में प्यार रखना।
आज के दिन हम क्या करते हैं?
लोग सफेद कपड़े पहनते हैं जो शांति का प्रतीक हैं।
बौद्ध मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं और फूलों से सजावट की जाती है।
महात्मा बुद्ध की शिक्षाएं विद्यार्थियों के लिए न केवल महान विचार हैं, बल्कि ये एक सफल और संतुलित जीवन जीने का "टाइम मैनेजमेंट टूल" भी हैं।
यहाँ बुद्ध की कुछ प्रमुख शिक्षाएं दी गई हैं, जो एक विद्यार्थी के जीवन को बदल सकती हैं:
🌟 विद्यार्थियों के लिए बुद्ध के अनमोल विचार
1. वर्तमान में जीना (Focus on Today)
"अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।"
सीख: अक्सर छात्र पुरानी गलतियों या आने वाली परीक्षाओं के डर में खोए रहते हैं। बुद्ध सिखाते हैं कि अगर आप आज के पाठ (Lesson) पर ध्यान देंगे, तो भविष्य अपने आप सुधर जाएगा।
2. अनुशासन और अभ्यास (Discipline)
"एक घड़ा बूंद-बूंद करके भरता है।"
सीख: सफलता रातों-रात नहीं मिलती। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ना और अभ्यास करना आपको एक दिन टॉपर या एक्सपर्ट बना सकता है।
3. क्रोध और वाणी पर नियंत्रण
"क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है; इसमें जलते आप खुद ही हैं।"
सीख: स्कूल या दोस्तों के बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है। बुद्ध कहते हैं कि गुस्सा सिर्फ आपका नुकसान करता है, इसलिए हमेशा शांत रहकर अपनी ऊर्जा पढ़ाई में लगायें।
4. स्वयं पर विश्वास (Self-Belief)
"अपना दीपक स्वयं बनें (अप्प दीपो भव)।"
सीख: दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी मेहनत और बुद्धि पर भरोसा करें। अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढने की कोशिश करना ही आपको आत्मनिर्भर बनाता है।
5. बुरी संगति से बचना
"एक दुष्ट मित्र से जंगली जानवर की तुलना में अधिक डरना चाहिए; क्योंकि जानवर आपके शरीर को घायल कर सकता है, लेकिन एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को भ्रष्ट कर सकता है।"
सीख: विद्यार्थी जीवन में सही दोस्तों का चुनाव बहुत जरूरी है। जो आपको लक्ष्य से भटकाएं, उनसे दूर रहना ही बुद्धिमानी है।
विद्यार्थी इसे कैसे अपनाएं?
सत्य बोलें: झूठ बोलने से मन में डर पैदा होता है, जिससे एकाग्रता (Concentration) कम होती है।
परोपकार: अपने सहपाठियों (Classmates) की पढ़ाई में मदद करें। ज्ञान बांटने से बढ़ता है।
ध्यान (Meditation): रोज कम से कम 10 मिनट शांत बैठकर सांसों पर ध्यान दें। इससे याददाश्त और फोकस बढ़ता है।
सादगी: सादा जीवन और उच्च विचार रखें। फिजूल की चीजों के पीछे भागने से समय बर्बाद होता है।
महात्मा बुद्ध के अनुसार, "मस्तिष्क ही सब कुछ है; आप जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं।" इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचें और अपनी मेहनत पर भरोसा रखें।
विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस 2026 (World Book and Copyright Day) 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। यूनेस्को (UNESCO) द्वारा घोषित यह दिन पठन-पाठन, प्रकाशन और कॉपीराइट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य किताबों और लेखकों के महत्व को मान्यता देना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
2026 में विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के प्रमुख पहलू:
तिथि: 23 अप्रैल 2026।
उद्देश्य: पुस्तकों, प्रकाशन, और कॉपीराइट (बौद्धिक संपदा) के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।
महत्व: यह दिन लेखकों और साहित्य को सम्मानित करता है और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करता है।
इतिहास: यह तिथि शेक्सपियर, मिगेल डे सर्वेंट्स और इंका गार्किलासो डी ला वेगा जैसे महान लेखकों की पुण्यतिथि से प्रेरित है, जो विश्व साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
आयोजन: दुनिया भर में, विशेषकर स्कूल, पुस्तकालय और प्रकाशक इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
आप इस दिन को कैसे मना सकते हैं:
अपनी पसंदीदा किताब को दोबारा पढ़ें।
किसी पुस्तक मेले या पुस्तकालय में जाएँ।
बच्चों को किताबें उपहार में दें और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि किताबें ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत हैं और हमारी संस्कृति को संरक्षित करती हैं।
विश्व विरासत दिवस हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है।
विश्व धरोहर दिवस का इतिहास
विश्व विरासत दिवस की शुरुआत 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) द्वारा की गई थी। बाद में 1983 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे आधिकारिक मान्यता दी, जिसके बाद यह दिन वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा।
विरासत दिवस का महत्व
यह दिन हमें हमारी सांस्कृतिक पहचान और इतिहास को बचाने का संदेश देता है। पुरानी इमारतें, स्मारक और प्राकृतिक स्थल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को हमारे अतीत से जोड़ते हैं।
विश्व विरासत दिवस की थीम?
हर साल विश्व विरासत दिवस एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। 2026 की थीम है, संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया। (Emergency Response for Living Heritage in the Context of Conflicts and Disasters)
LIST OF WORLD HERITAGE SITES IN INDIA/भारत की विश्व विरासत स्थलों की सूची
Personality of the Month/ इस माह के विशिष्ट व्यक्तित्व
हर वर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य के भविष्य को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। वर्ष 2026 में यह दिवस एक ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब दुनिया स्वास्थ्य चुनौतियों, वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक सहयोग के नए आयामों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष की थीम “Together for health. Stand with science.” विशेष महत्व रखती है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत 1948 में हुई, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी पहली विश्व स्वास्थ्य सभा में 7 अप्रैल को प्रतिवर्ष इस दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 1950 से इसकी औपचारिक शुरुआत हुई और तब से यह दिन WHO की स्थापना की स्मृति के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रमुख अवसर बन गया है। हर वर्ष एक विशेष थीम के माध्यम से दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को उजागर किया जाता है और उनके समाधान के लिए प्रयास किए जाते हैं।
वर्ष 2026 की थीम वैज्ञानिक सहयोग और प्रमाण-आधारित निर्णयों की आवश्यकता पर जोर देती है। यह संदेश स्पष्ट है कि आधुनिक स्वास्थ्य संकटों का समाधान केवल विज्ञान और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से ही संभव है। इस अभियान के तहत “वन हेल्थ” दृष्टिकोण को भी प्रमुखता दी गई है, जो मानव, पशु, वनस्पति और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानता है।
इस वर्ष के अभियान के तीन प्रमुख केंद्र बिंदु हैं:
विश्वास की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य नीतियों में तथ्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णयों को बढ़ावा देना।
वैज्ञानिक सहयोग: वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों और संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना।
वन हेल्थ एक्शन: मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित कर खतरों का समाधान करना।
विश्व स्वास्थ्य दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि वर्ष भर चलने वाला अभियान है, जो सरकारों, संस्थाओं और नीति निर्माताओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा केवल नीतियों से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और वैज्ञानिक सोच से सुनिश्चित की जा सकती है। वर्ष 2026 का विश्व स्वास्थ्य दिवस एक स्पष्ट संदेश देता है यदि दुनिया को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ना है, तो विज्ञान के साथ खड़ा होना और सहयोग की भावना को मजबूत करना अनिवार्य है। यही दृष्टिकोण आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती का आधार बनेगा। क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा केवल नीतियों से नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और वैज्ञानिक सोच से सुनिश्चित की जा सकती है। वर्ष 2026 का विश्व स्वास्थ्य दिवस एक स्पष्ट संदेश देता है यदि दुनिया को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ना है, तो विज्ञान के साथ खड़ा होना और सहयोग की भावना को मजबूत करना अनिवार्य है। यही दृष्टिकोण आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती का आधार बनेगा।
केन्द्रीय विद्यालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल गौचर की प्रातःकालीन सभा में दिनांक 22/06/2026 (मंगलवार) को भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कर...