Monday, November 25, 2024

Constitution Day/ संविधान दिवस _ 26 November



कंस्टीटूशन डे, जिसे 'संविधान दिवस' के नाम से भी जाना जाता है, हमारे देश में हर साल 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान अपनाया, जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को नागरिकों के बीच संविधान मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबर के दिन को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने के भारत सरकार के निर्णय को अधिसूचित किया था।

Constitution Day also known as 'Samvidhan Divas', is celebrated in our country on 26th November every year to commemorate the adoption of the Constitution of India. On 26th November 1949, the Constituent Assembly of India adopted the Constitution of India, which came into effect from 26th January 1950.


The Ministry of Social Justice and Empowerment on 19th November 2015 notified the decision of Government of India to celebrate the 26th day of November every year as 'Constitution Day' to promote Constitution values among citizens.





Friday, October 4, 2024

AMRIT KAAL STORY WRITING COMPETITI FOR CLASS 9-12 ON NCERT RASHTRIYA E PUSTAKALAYA APP

 

DOWNLOAD THE APP BY CLICKING- https://play.google.com/store/apps/details?id=national.digital.library 



INSTRUCTIONS AND GUIDELINES

Theme

Rashtriya e Pustakalaya invites you to express your creativity in the Amrit Kaal Story Writing Competition. This competition provides an opportunity for you to craft stories that reflect hope, innovation, and transformation for India's future. Share your vision for a better, cleaner, and more prosperous India during this transformative era of Amrit Kaal. Let your stories inspire the nation, fostering change and encouraging collective progress!

The overarching theme of the stories on Amrit Kaal will encompass “My Idea for a Viksit Bharat (Developed India)”. Students from classes 9 to 12 can submit their stories on any of the following themes :

  1. 1. Unsung heroes of India.
  2. 2. Developing unity, and a sense of duty among Indians.
  3. 3. How youth power can bring positive changes in the society.
  4. 4. Unleashing the potential of India.
  5. 5. Green growth stories.

Format

  1. 1. Stories must have a Title and must not exceed 1000 words.
  2. 2. Stories should be submitted in any of the 22 languages listed under the Eighth Schedule of the Constitution, in addition to English.
  3. 3. Submissions should be in a clear, downloadable format, and can either be text, PNG, JPG, or PDF.

Evaluation Criteria

Stories will be evaluated based on the following criteria:

  1. 1. Content and understanding of the theme.
  2. 2. Accuracy.
  3. 3. Fluency.

Additional Information

  1. 1. By submitting your story, you grant permission for its use in promotional materials by the Ministry of Education and Rashtriya e Pustakalaya.
  2. 2. Ensure your story adheres to the competition guidelines and is free of offensive content.
  3. 3. The content must be original, and any plagiarism will result in the disqualification of the candidate.
  4. 4. Maximum time to complete the submission is 1 hour.







Wednesday, September 4, 2024

राष्ट्रीय शिक्षक दिवस विशेष_ इस माह के विशिष्ट व्यक्तितव् डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण

  

आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति के तौर पर डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा गया है. वे दर्शनशास्त्र का भी बहुत ज्ञान रखते थे, उन्होंने भारतीय दर्शनशास्त्र में पश्चिमी सोच की शुरुवात की थी. राधाकृष्णन प्रसिध्य शिक्षक भी थे, यही वजह है, उनकी याद में हर वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है|

जीवन परिचय बिंदु राधाकृष्णन जीवन परिचय
पूरा नामडॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
धर्महिन्दू
जन्म5 सितम्बर 1888
जन्म स्थानतिरुमनी गाँव, मद्रास
माता-पितासिताम्मा, सर्वपल्ली विरास्वामी
विवाहसिवाकमु (1904)
बच्चे5 बेटी, 1 बेटा

डॉ राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को तमिलनाडु के छोटे से गांव तिरुमनी में ब्राह्मण परिवार में हुआ था|इनके पिता का नाम सर्वपल्ली विरास्वामी था, वे गरीब जरुर थे किंतु विद्वान ब्राम्हण भी थे| इनके पिता के ऊपर पुरे परिवार की जिम्मदारी थी, इस कारण राधाकृष्णन को बचपन से ही ज्यादा सुख सुविधा नहीं मिली.  

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की शिक्षा 

डॉ राधाकृष्णन का बचपन तिरुमनी गांव में ही व्यतीत हुआ. वहीं से इन्होंने अपनी शिक्षा की प्रारंभ की. आगे की शिक्षा के लिए इनके पिता जी ने क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल, तिरुपति में दाखिला करा दिया. जहां वे 1896 से 1900 तक रहे. सन 1900 में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने वेल्लूर के कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की. तत्पश्चात मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास से अपनी आगे की शिक्षा पूरी की. वह शुरू से ही एक मेंधावी छात्र थे. इन्होंने 1906 में दर्शन शास्त्र में M.A किया था. राधाकृष्णन जी को अपने पुरे जीवन शिक्षा के क्षेत्र में स्कालरशिप मिलती रही|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के करियर की शुरुवात –

1909 में राधाकृष्णन जी को मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र का अध्यापक बना दिया गया| सन 1916 में मद्रास रजिडेसी कालेज में ये दर्शन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक बने. 1918 मैसूर यूनिवर्सिटी के द्वारा उन्हें दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में चुना गया| तत्पश्चात वे इंग्लैंड के oxford university में भारतीय दर्शन शास्त्र के शिक्षक बन गए. शिक्षा को डॉ राधाकृष्णन पहला महत्व देते थे. यही कारण रहा कि वो इतने ज्ञानी विद्वान् रहे. शिक्षा के प्रति रुझान ने उन्हें एक मजबूत व्यक्तित्व प्रदान किया था. हमेशा कुछ नया सीखना पढने के लिए उतारू रहते थे. जिस कालेज से इन्होंने M.A किया था वही का इन्हें उपकुलपति बना दिया गया. किन्तु डॉ राधाकृष्णन ने एक वर्ष के अंदर ही इसे छोड़ कर बनारस विश्वविद्यालय में उपकुलपति बन गए. इसी दौरान वे दर्शनशास्त्र पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखा करते थे|

डॉ राधाकृष्णन, विवेकानंद और वीर सावरकर को अपना आदर्श मानते थे. इनके बारे में इन्होंने गहन अध्ययन कार रखा था. डॉ राधाकृष्णन अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से समूचे विश्व को भारतीय दर्शन शास्त्र से परिचित कराने का प्रयास किया. डॉ.राधाकृष्णन बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति भी थे|

डॉ राधाकृष्णन का राजनीती में आगमन –

जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस समय जवाहरलाल नेहरू ने राधाकृष्णन से यह आग्रह किया, कि वह विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें.  नेहरूजी की बात को स्वीकारते हुए डॉ.राधाकृष्णन ने 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया. संसद में सभी लोग उनके कार्य और व्यव्हार की बेहद प्रंशसा करते थे. अपने सफल अकादमिक कैरियर के बाद उन्होंने राजनीतिक में अपना कदम रखा|                                                                                                                                         13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक वे देश के उपराष्ट्रपति रहे . 13 मई 1962 को ही वे भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए|

डॉ.राधाकृष्णन को मिले सम्मान व अवार्ड   

  • शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉ. राधाकृष्णन को सन 1954 में सर्वोच्च अलंकरण “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया.
  • 1962 से राधाकृष्णन जी के सम्मान में उनके जन्म दिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई|
  • सन 1962 में डॉ. राधाकृष्णन को “ब्रिटिश एकेडमी” का सदस्य बनाया गया.
  • पोप जॉन पाल ने इनको “गोल्डन स्पर” भेट किया.
  • इंग्लैंड सरकार द्वारा इनको “आर्डर ऑफ़ मेंरिट” का सम्मान प्राप्त हुआ.

डॉ. राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन शास्त्र एवं धर्म के उपर अनेक किताबे लिखी जैसे “गौतम बुद्धा: जीवन और दर्शन” , “धर्म और समाज”, “भारत और विश्व” आदि. वे अक्सर किताबे अंग्रेज़ी में लिखते थे|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मृत्यु  

17 अप्रैल 1975 को एक लम्बी बीमारी के बाद डॉ राधाकृष्णन का निधन हो गया. शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान हमेंशा याद किया जाता है. इसलिए 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाकर डॉ.राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है. इस दिन देश के विख्यात और उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके योगदान के लिए पुरुस्कार प्रदान किए जाते हैं. राधाकृष्णन को मरणोपरांत 1975 में अमेंरिकी सरकार द्वारा टेम्पलटन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो कि धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिए प्रदान किया जाता है. इस पुरस्कार को ग्रहण करने वाले यह प्रथम गैर-ईसाई सम्प्रदाय के व्यक्ति थे|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनमोल वचन  

Sarvepalli radhakrishnan quotes

SR quotes

 




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QUESTIONNAIRE UNDER AWARENESS CAMPAIGN DURING ANTI DENGUE MONTH (1-31 JULY 2026)

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